
मैं जीवन हूँ विभिन्न उत्सवों को लेकर, अपने में समेटकर अभिनय मुखी कलाकार हूँ । कभी पुरुषोत्तम के आगमन के उल्लास में दीपक लिए मैं दीपावली बनकर पृथ्वी के धैर्य एवं आकाश के पराक्रम को सिद्ध करता ईश्वरीय सत्ता लिए मैं राम हूँ । नेति नेति की भूमिका से ज्ञापित ब्रह्म को धरा पर अवतरित होते, विश्वास पर अडिग श्रद्धा (जिन्हें आज हम भूल रहे हैं) की सर्वोच्चता सिद्ध कराता प्रह्लाद के होलिकोत्सव में, असंभव को संभव होते, खंभे से नरसिंह के प्रकट होने का, साक्षी बना मैं जीवन हूँ। मैं अनुपम रंग कर्मी हूँ सात समद से भी बड़ी, विविध रंगों से भरे पात्र की स्याही, श्वास और समय की लेखनी से अंतरिक्ष के पटल पर चरित्र मंचन एवं लेखन एक साथ करता मैं अनंत संभावनाओं वाला प्रतिपल परिवर्तित जीवन हूँ। मैं मानस एवं महाभारत हूँ जहाँ एक तरफ कोई राज पद लेने को तैयार नहीं तो दूसरी ओर सुई की नोक बराबर भूमि के लिए अठारह अक्षौहिणी सेना बलि हो जाती है। मैं हूँ विरुद्धों का सामंजस्य, सब कुछ संतुलन करने वाला सारे सुख दुःख का प्रत्यक्षदर्शी, कर्ता का भान छोड़ समर्पण के भाव रखकर अनंत रंगों वाला हूँ दुनिया की बैर-प्रीति से परे, पक्ष हीन भाव का वाहक, मैं काल चक्र का जीवन हूँ मैं ही जीवन हूँ। मैं उभयतोपाश हूँ दुविधा में रहने का चिर अभिलाषी, सुख-दुःख में अंदर बाहर दो तरफ़ा मुख वाला मृतप्राय दशा में भी अगणित कामनाओं अमर वासनाओं से युक्त सतत जीवन हूँ।
-कमल चन्द्र शुक्ल

very nice poem sir, tho im laksh ^_^
just wanna know about your blog, that what language you prefer for web development, code and other stuffs. and if you have your own domain? ❤
LikeLike
WordPress
LikeLike