
अंतर्मन में आपका स्वागत है
सफल व्यक्ति वह है जो सोचता है और सोचे हुए को करता भी है, सिर्फ सोचते रहने वाला इतिहास के रथ चक्र के नीचे पिस जाता है |
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और क्या ?
दुर्दांत पशु नहीं तो और क्या?अपने मन के मलाल की पूर्ति के लिए,दूसरों के विचारों के घर में ताकनाअपराध नहीं तो और क्या?अपने समाज के नियम कोदूसरे देश पर जबरन थोपना,न मानने पर सख़्ती करनाअपराध नहीं तो और क्या?तनकर खड़े हुए जन समूहअपनी अस्मिता की रक्षा के लिए,तुम सबक सिखाना चाहो उन्हें ज़िद मेंअपराध नहीं…
चिनाब पे
पांच मई पच्चीस को जब भारत-सम्राट ने चिनाब के जल प्रवाह को रोका तो मैंने प्रवासी अखनूर के नाते दरिया को टोका । माते चिनाब ! तू पाकिस्तान क्यों गई? न जाती तो आज इतनी बड़ी बात न होती । न तेरा बहाव रोका जाता और न तुम पर आश्रित लोग, जीव जंतु यूं तड़पते।…
समर्पण
मैंने सोचा, तितलियों को देखकरबहुत बार जांचामैने अपने अनुभवों कोबहुत सारी कविताओं मेंबाँचालेकिन मिला नहीं वहजिसकी आशा थीअपितु मंजिल कुछ और दिखी,जिसमें कहा गया किलगाव और प्रेमसमर्पण की खुली अंजुली हैं ,पानी की स्नेह सिक्त छुवन है.जहांअभीष्ट की गुंजाइश नहीं,दबाव की, बंद की हुईमुट्ठी नही, जिसमेंआज़ादी की इति श्री हो जाती है। -कमल चन्द्र शुक्ल
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